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राजस्थानी लघुकथा - पर्दो अर गहना - डॉ रानी तँवर

गाँव में ढोल-नगारा बज्या, गली-गली में हुंकार उठी— "जमींदार री बहू आवे है, देखो देखो…!"

 

सोने-चाँदी री झंँकार, गहना-गठ्ठा, लाल-पीळा जोड़ा, बींदणी असी सजली लागी जणों कोई देवी मूर्त्ति हो।