हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
लोहागढ़ की शान और आँखि’न कौ तारौ सूरजमल
यों तो राजा भौत भये पर सबते न्यारौ सूरजमल
मुगल और अँगरेजन ते जब बडे बडे घबराय गए
दई कब्बडी, बीच खेत में खेंच्यौ फारौ, सूरजमल