हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
जाने दो मुझको,
हठ अब तुम छोड़ो जी।
कोई ना वेध सका,
पुतली मछली की,
राजा का धैर्य थका