होली के माहिये – अर्चना वर्मा सिंह


साजन मत छेड़ो जी,

जाने दो मुझको,

हठ अब तुम छोड़ो जी।

 

रंगों की पिचकारी,

हाथ लिए पीछे,

मुझ पर क्यों दे मारी।

 

मस्तों की हैं टोली,

नैन मिला गोरी,

आ खेले हम होली।

 

होली की रीत बड़ी,

मन मत बैर रखो,

जग में है प्रीत बड़ी।

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