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तज़मीनी (मुख़म्मस) ग़ज़ल – सत्यवान सत्य

 


माना कि तुझसा है नहीं तैराक यार देख

इस फील्ड में है तू बड़ा ही होनहार देख

लेकिन ज़माने पर नहीं है एतबार देख

तज़मीनी (मुख़म्मस) ग़ज़ल - के पी अनमोल


फूल अपने हार पर भारी पड़ा

सुर मधुर झंकार पर भारी पड़ा

हाथ ख़ुद पतवार पर भारी पड़ा

"काम ज़िम्मेदार पर भारी पड़ा

यार का ग़म यार पर भारी पड़ा"