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श्राद्ध के दिन पर्व मनाएँ या नहीं

How to celebrate Diwali If shradham falls on that day?

प्रश्न पूछा गया है कि श्राद्ध तिथि अगर दिवाली को पड़ जाये तो दिवाली को कैसे सेलिब्रेट किया जाये ?

सबसे पहले तो हमें यह समझ लेना चाहिए कि हम श्राद्ध क्यों मनाते हैं और श्राद्ध का अर्थ क्या होता है ?

श्राद्ध का अर्थ

अपने पितरों को याद कर के उन के कल्याण हेतु अपनी-अपनी लोक रीतियों के अनुसार जो कुछ भी पुण्य काम हम सच्ची श्रद्धा के साथ करते हैं उसे श्राद्ध कहा जाता है ।

श्राद्ध क्यों मनाते हैं

हमारे बड़े-बुजुर्ग जो कि जीवित हैं उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए हमारे पास अनेक विकल्प होते हैं मगर हमारे जो बड़े-बुजुर्ग स्वर्गवासी हो चुके हैं उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए श्राद्ध-कर्म किया जाता है ।

श्राद्ध तिथि को पर्व मनाएँ या नहीं

यह प्रश्न सैद्धान्तिक कम और व्यावहारिक अधिक है । यह विषय अलग-अलग व्यक्तियों के लिए अलग-अलग प्रसंगों के लिए अलग-अलग है । यदि वह तिथि किसी बड़े-बुजुर्ग की है जो सबकुछ भोग-विलास कर के भरा-पूरा परिवार छोड़ कर के सुखद स्थिति में इस नश्वर संसार को छोड़ कर परलोक सिधारे हैं उस केस में तो सुबह के समय तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करने के उपरान्त अन्य पारिवारिक सदस्यों की सहमति के साथ पर्व मनाने में कोई समस्या नहीं है परन्तु यदि यह प्रसंग दुखदायक है तो ऐसे में पर्व सम्बन्धी निर्णय लोक के अनुसार पारिवारिक सदस्यों से परामर्श कर के लेना ही अच्छा रहता है ।

अगर ज़िन्दगी काया है तो उपटन हैं त्यौहार - नवीन

अगर ज़िन्दगी काया है तो उपटन हैं त्यौहार 
शाश्वत जीवन दर्शन का अवगाहन हैं त्यौहार 

विकल ह्रदय में सम्बल जागे
थका बदन भी सरपट भागे
कैसा भी हो कोई निठल्ला 
त्यौहारों में 'हिल्ले' लागे
निज रूचि के अनुसार सभी को देते हैं रुजगार 
इसीलिये तो कहते हैं दुःख-भञ्जन हैं त्यौहार 

चौखट पर जब आते उत्सव 
ख़ुशियों को बरसाते उत्सव 
नारी और गृहस्थी का 
औचित्य-सार समझाते उत्सव 
जीवन की ख़ुशहाली का हैं यही सही आधार 
जगतीतल में रिश्तों का अभिनन्दन हैं त्यौहार 

इनसे ही जीवन में रति है
सदाचार-सौहार्द सुमति है 
इनके बिना स्थूल है जीवन 
ये हैं तो जीवन में गति है 
इनकी महिमा अद्भुत, अनुपम, अविचल, अपरम्पार
प्रगति-पन्थ-परिवृद्धि हेतु प्रोत्साहन हैं त्यौहार 

धर्मों का सङ्काय हिन्द है 
तत्वों का अभिप्राय हिन्द है  
सुविचारों का प्रथम प्रणेता
पर्वों का पर्याय हिन्द है 
विश्व गुरु का मान  तभी तो देता है सन्सार 
मानव में मौज़ूद ईश का वन्दन हैं त्यौहार

:- नवीन सी. चतुर्वेदी