ચાલો આજે હોળી રમીએ.
દ્વેષ સઘળાં છોડી, રમીએ.
બોલ્યા વિના મહિના વિત્યાં!
સૌ અબોલા તોડી, રમીએ...
શ્વેત - ચોખ્ખું દિલનું પાનું,
પ્રેમ રંગો, બોળી, રમીએ.
આંખોથી આંખોની વાતો,
ચિતડું કોઈ ચોરી, રમીએ.
છો સદા એ લીલા કરતો,
તું બન ગોપી ભોળી; રમીએ.
રંગ લાગ્યો ભગવો ભીતર!
માંહ્ય ચેતન ખોળી, રમીએ
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