ગઝલ - ચાલો આજે હોળી રમીએ - ચેતન ફ્રેમવાલા

 

ચાલો આજે હોળી રમીએ.
દ્વેષ સઘળાં છોડી
, રમીએ.
 
બોલ્યા વિના મહિના વિત્યાં!
સૌ અબોલા તોડી
, રમીએ...


શ્વેત - ચોખ્ખું દિલનું પાનું,
પ્રેમ રંગો, બોળી, રમીએ.
 
આંખોથી આંખોની વાતો,
ચિતડું કોઈ ચોરી, રમીએ.
 
છો સદા એ લીલા કરતો,
તું બન ગોપી ભોળી; રમીએ.
 
રંગ લાગ્યો ભગવો ભીતર!
માંહ્ય ચેતન ખોળી
, રમીએ

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