જાત સાથે હજાર વાર કરી!
વાત એણે જે બે કે ચાર કરી!
માત્ર એના સતત વિચાર કરી,
જાગીને રાત મેં પસાર કરી.
ખાલીપાથી ભરી દીધું જીવન;
આજીવન એક તરફી પ્યાર કરી!
ફક્ત એક જ પ્રહારે તોડી હૃદય,
કાળજી એણે જોરદાર કરી.
અન્યના ધ્યાનમાં ન આવ્યું ભલે,
લાભ છે જાતમાં સુધાર કરી.
લક્ષણોમાં ઉદાસી ને આંસુ,
ક્ષણ મિલનની ગઈ બીમાર કરી!

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी करने के लिए 3 विकल्प हैं.
1. गूगल खाते के साथ - इसके लिए आप को इस विकल्प को चुनने के बाद अपने लॉग इन आय डी पास वर्ड के साथ लॉग इन कर के टिप्पणी करने पर टिप्पणी के साथ आप का नाम और फोटो भी दिखाई पड़ेगा.
2. अनाम (एनोनिमस) - इस विकल्प का चयन करने पर आप की टिप्पणी बिना नाम और फोटो के साथ प्रकाशित हो जायेगी. आप चाहें तो टिप्पणी के अन्त में अपना नाम लिख सकते हैं.
3. नाम / URL - इस विकल्प के चयन करने पर आप से आप का नाम पूछा जायेगा. आप अपना नाम लिख दें (URL अनिवार्य नहीं है) उस के बाद टिप्पणी लिख कर पोस्ट (प्रकाशित) कर दें. आपका लिखा हुआ आपके नाम के साथ दिखाई पड़ेगा.
विविध भारतीय भाषाओं / बोलियों की विभिन्न विधाओं की सेवा के लिए हो रहे इस उपक्रम में आपका सहयोग वांछित है. सादर.