बालगीत - मेरे प्यारे मामा जी - आशा पाण्डेय ओझा 'आशा'

 


मेरे  प्यारे  मामा जी ।

खेला करते ड्रामा जी ।।

 

रावण बनते कभी-कभी ,

बनते कभी सुदामा जी ।

 

कभी पादरी बन जाते ,

कभी बने वे गामा जी ।

 

कभी हँसाते जोकर बन ,

पहने फटा पजामा जी ।

 

उछल-उछल कर इधर-उधर ,

करते हैं          हंगामा जी

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