अवधी लोकगीत – दुअरे पर आइल बारात – कुसुम तिवारी ‘झल्ली’

 
दुअरे पर आइल बारात
हे बबुनी हमार बबुनी
झलक तनी पहुना क देखी ल

भौजी के अंचरा में मोह जिन छिपाव
ए बबुनी आव एहरियाँ त आव
सखियन क लै ल तू आड़...
हे बबुनी हमार बबुनी
झलक तनी पहुना क देखी ल,

छुप  -छुप के कनखी से मुस्कि जिन मार
लाजे संकोचे क अंचरा तू धार
खनकै न, अरे खनके न कंगना तोहार
हे बबुनी  हमार बबुनी
झलक तनी पहुना क देखी ल

होतै भिनसहरे तू काल चलि जैइबू
पहुना के संघे तू काल चली जैइबू
रहिया दुअरिया के याद बहुत अइबू
भुलावू जिन, भुलाउ जिन
अंगना हमार
हे बबुनी हमार बबुनी
झलक तनी पहुना क देखी ल

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