31 July 2014

तकलीफ़ों के बाद तनिक आराम है - डा. राम मनोहर त्रिपाठी

तकलीफ़ों के बाद तनिक आराम है
तुम कहते हो गीतों से क्या काम है

गीतों का बादल मुझ को नहलाता है
स्वर का गुंजन घावों को सहलाता है
यह हर दुख में मेरा मन बहलाता है
मेरा जीना ही इस का परिणाम है
तुम कहते हो गीतों से क्या काम है

यही सोच कर तुम को भी हैरानी है
जो दुखियारा है मेरी पहिचानी है
सब से परिचित मेरी राम कहानी है
मेरे लिए यही पैसा है दाम है
तुम कहते हो गीतों से क्या काम है

भावुकता के वेश हजारों धरता हूँ
मधु-ऋतु सा लिख कर, पतझर सा झरता हूँ
ध्यान लगा कर स्वर की पूजा करता हूँ
गीतों के मन्दिर में मेरा राम है

तुम कहते हो गीतों से क्या काम है 

:- डा. राम मनोहर त्रिपाठी

No comments:

Post a Comment

नई पुरानी पोस्ट्स ढूँढें यहाँ पर

काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

यहाँ प्रकाशित सभी सामग्री के सभी अधिकार / दायित्व तत्सम्बन्धित लेखकाधीन हैं| अव्यावसायिक प्रयोग के लिए स-सन्दर्भ लेखक के नाम का उल्लेख अवश्य करें| व्यावसायिक प्रयोग के लिए पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है|

साहित्यम पर अधिकान्शत: छवियाँ साभार गूगल से ली जाती हैं। अच्छा-साहित्य अधिकतम व्यक्तियों तक पहुँचाने के प्रयास के अन्तर्गत विविध सामग्रियाँ पुस्तकों, अनतर्जाल या अन्य व्यक्तियों / माध्यमों से सङ्ग्रहित की जाती हैं। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री पर यदि किसी को किसी भी तरह की आपत्ति हो तो अपनी मंशा विधिवत सम्पादक तक पहुँचाने की कृपा करें। हमारा ध्येय या मन्तव्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं है।