18 January 2011

पहली समस्या पूर्ति - चौपाई - धर्मेन्द्र कुमार 'सज्जन' जी [3]

पहली समस्या पूर्ति - चौपाई - धर्मेन्द्र कुमार 'सज्जन' जी

सम्माननीय साहित्य रसिको

आइए आज पढ़ते हैं मित्र धर्मेन्द्र कुमार 'सज्जन' जी को| आप की 'सज्जन की मधुशाला' [http://sajjankimadhushala.blogspot.com] ने काफ़ी प्रभावित किया है| आपका कल्पना लोक {http://dkspoet.blogspot.com] भी काफ़ी रुचिकर है| आइए पढ़ते हैं कि समस्या पूर्ति की पंक्ति 'कितने अच्छे लगते हो तुम' को कितने प्रभावशाली और रोचक ढँग से पिरोया है आपने अपने कथ्य में|

नन्हें मुन्हें हाथों से जब ।
छूते हो मेरा तन मन तब॥
मुझको बेसुध करते हो तुम।
कितने अच्छे लगते हो तुम |१|

रोम रोम पुलकित करते हो।
जीवन में अमृत भरते हो॥
जब जब खुलकर हँसते हो तुम।
कितने अच्छे लगते हो तुम |२|

पकड़ उँगलियाँ धीरे धीरे।
जब जीवन यमुना के तीरे|
'बाल-कृष्ण' से चलते हो तुम।
कितने अच्छे लगते हो तुम।३|

देर से आने वाले साहित्य रसिकों को फिर से बताना चाहूँगा कि:-

समस्या पूर्ति की पंक्ति है : - "कितने अच्छे लगते हो तुम"

छंद है चौपाई
हर चरण में १६ मात्रा

अधिक जानकरी इसी ब्लॉग पर उपलब्ध है|


सभी साहित्य रसिकों का पुन: ध्यनाकर्षण करना चाहूँगा कि मैं स्वयँ यहाँ एक विद्यार्थी हूँ, और इस ब्लॉग पर सभी स्थापित विद्वतजन का सहर्ष स्वागत है उनके अपने-अपने 'ज्ञान और अनुभवों' को हम विद्यार्थियों के बीच बाँटने हेतु| इस आयोजन को गति प्रदान करने हेतु सभी साहित्य सेवियों से सविनय निवेदन है कि अपना अपना यथोचित योगदान अवश्य प्रदान करें| अपनी रचनाएँ navincchaturvedi@gmail.com पर भेजने की कृपा करें|

7 comments:

  1. बाल कृष्ण को चलते देखा ।
    सुन्दर है कविता की रेखा ॥
    राम कृष्ण क्या कोई बच्चा ।
    चलत बकइयां लगता अच्छा ॥
    ऐसी रचना रचते हो तुम ।
    मुझको अच्छे लगते हो तुम ॥

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  2. उमाशंकर भाई आपका टिप्पणी देने का अंदाज भी निराला है

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  3. उमाशंकर जी के आशीर्वाद देने का तरीका ही निराला। उनका आशीर्वाद मिला ये चौपाइयाँ धन्य हुईं।

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  4. धरमेंदर भाई की रचना
    इनकी शैली का क्या कहना
    दिल से रचना करते हो तुम
    कितने अच्छे लगते हो तुम

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  5. मयंक अवस्थीFri Jan 21, 10:49:00 am 2011

    धर्मेन्द्र जी ने तो वात्सल्य भरपूर भर दिया लेकिन कंचन जी तो अप्रतिम और विलक्षण हैं ।ये अहर्निश सृजनशीलता --प्रणम्य है ।

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  6. हरमन जी, शेषधर जी और मयंक जी आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद।

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