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सौंपी जिसे दुकान, वही तिजोरी ले उड़ा - नवीन


नमस्कार

जैसा कि आप सभी को ज्ञात है कि समस्या-पूर्ति आयोजन के दौरान जिस छन्द पर कार्यशाला चल रही होती है, मैं वह छन्द नहीं लिखता या फिर पोस्ट तो हरगिज़ नहीं करता। हालाँकि घनाक्षरी छंद वाले आयोजन की बहु भाषा-बोली वाली पोस्ट के लिये मेरे द्वारा गुजराती और मराठी भाषा में प्रस्तुत किये गये घनाक्षरी छन्द इस का अपवाद भी हैं। वर्तमान आयोजन के लिये जब तक आप लोग अपने दोहों के परिमार्जन में व्यस्त हैं, मैं कुछ सोरठे प्रस्तुत करने की अनुमति चाहता हूँ। आप को पूर्ण अधिकार है इन सोरठों की समीक्षा का। जहाँ भी आप को त्रुटि दिखाई पड़े, सुधार हेतु उपयुक्त सुझाव के साथ मेरा मार्गदर्शन करने की कृपा करें।


ठेस:-
हम ही थे नादान, क्या बतलाएँ आप को
सौंपी जिसे दुकान, वही तिजोरी ले उड़ा