“खाना लगा दूँ?”
“हूँ...”
“मूड तो अच्छा है?”
“हाँ...”
“स्मिता आजकल ज़िद नहीं करती।”
“हूँ...”
“अब बाज़ार भाव फिर बढ़ने लगे हैं।”
“हाँ...”
“पड़ोस के वर्माजी का बच्चा बहुत बीमार है।”
“हूँ...”
“थोड़ी मिठाई भी लीजिए ना...”
“उँहूँ...”
“नीता की शादी में चलेंगे ना?”
“हाँ-हाँ...”
“........”
“........”
“आपकी
क्लास-फ़ेलो कुमुद आई थी, बड़ी देर तक इंतज़ार करती
रही।”
“अच्छा! कब? कहाँ है वह आजकल? कैसी है? तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया? बताओ, और क्या-क्या कहा उसने...?”
“मैंने यह सब
उससे पूछा था, किंतु वह हाँ-हूँ करती रही।”
सौजन्य – योगराज प्रभाकर जी

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