दान-पुण्य की बातें हम न करें तो कौन करेगा!! भारत में जन्म लेनेवाला, दान का भाव साथ लेकर जन्मता है। बात ये है कि वे भी और हम भी इसी माटी के हैं। समय के साथ वे जोंक बन गए और हम मनुष्य के मनुष्य ही रहे। उन्हें जोंक का आहार-व्यवहार बड़ा पसन्द आता। हमारे लिए नापसन्दगी जैसा कुछ था ही नहीं,,,। हमारी जुर्रत भी नहीं थी कि हम अपनी पसन्द बतायें। हम तो वे हैं जो ट्रेन की निचली बर्थ देकर मिडिल पर एडजस्ट हो जाते हैं। जरूरत पड़े तो बस के बोनट पर आराम भी फरमा लेते हैं।
