अवधी लोकगीत - हम तो ह‌ई बाबा अंगना के चिड़िया - किरन तिवारी

 

( विदाई गीत )

हम तो ह‌ई बाबा अंगना के चिड़िया

चहकीले  हम सुबहो-शाम हो

काहिके शदियां  रचाव तारा बाबा

काहे देते घर से निकाल हो

 तू तो ह‌ऊ बेटी हमरी चिर‌ईयां

ह‌ऊ तूही हमार अभिमान हो

दुनिया के रीति ‌इह‌ई ह‌ऊवे बेटी

भेज‌ई पड़ी दुसरा के साथ हो

 

चुटकी भर सेन्हूरा महंग परीस बाबा

छोड़‌ई पड़ी आपन घर-द्वार हो

दुसरा के आपन बन‌उब हे बाबा

आपन बेटी घर से निकाल हो

 

अइसन बचन जिनी बोलस मोरी बेटी

फाटेला करेजवा हमार हो

लक्ष्मी के रूप बनी रहा अपना ससुरे

ऊह‌उ ह‌ऊव‌ई तोहार घर-बार हो

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी करने के लिए 3 विकल्प हैं.
1. गूगल खाते के साथ - इसके लिए आप को इस विकल्प को चुनने के बाद अपने लॉग इन आय डी पास वर्ड के साथ लॉग इन कर के टिप्पणी करने पर टिप्पणी के साथ आप का नाम और फोटो भी दिखाई पड़ेगा.
2. अनाम (एनोनिमस) - इस विकल्प का चयन करने पर आप की टिप्पणी बिना नाम और फोटो के साथ प्रकाशित हो जायेगी. आप चाहें तो टिप्पणी के अन्त में अपना नाम लिख सकते हैं.
3. नाम / URL - इस विकल्प के चयन करने पर आप से आप का नाम पूछा जायेगा. आप अपना नाम लिख दें (URL अनिवार्य नहीं है) उस के बाद टिप्पणी लिख कर पोस्ट (प्रकाशित) कर दें. आपका लिखा हुआ आपके नाम के साथ दिखाई पड़ेगा.

विविध भारतीय भाषाओं / बोलियों की विभिन्न विधाओं की सेवा के लिए हो रहे इस उपक्रम में आपका सहयोग वांछित है. सादर.