જેની પર તું નજર કરે છે
એની પળમાં દશા ફરે છે
ભર વસંતે લીલું ખરે છે.
ડાળને પણ અસર કરે છે.
લીલને લઇ ગયો છે તડકો!
એને પથરો હજી સ્મરે છે.
ના પૂછે ;ના કોઈ ખરીદે;
લાગણી વાજબી દરે છે.
બંધ છે ગોખલામાં શ્રધ્ધા
અંધશ્રધ્ધા હરે ફરે છે.
જીંદગી; શેરડીનો સાંઠો;
દર્દ એને ચૂસ્યા કરે છે.
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