नदी और नारी, दोनों ही सृष्टि की जीवनदायिनी धारा हैं। दोनों का अस्तित्व मानव समाज और प्रकृति के लिए अपरिहार्य है। जिस प्रकार नदी अपनी लहरों के साथ जीवन को सींचती है, उसी प्रकार नारी अपने स्नेह और त्याग से परिवार और समाज को पोषित करती है।
नदी का स्वभाव है प्रवाह। वह पर्वतों से निकलकर घाटियों, मैदानों और मरुस्थलों तक अपना मार्ग बनाती है। कहीं वह शांत बहती है, तो कहीं प्रचंड वेग से गर्जना करती हुई। ठीक उसी तरह नारी भी परिस्थितियों के अनुसार अपना स्वरूप बदल लेती है। वह कभी कोमल भावनाओं से घर-आँगन को सजाती है, तो कभी कठिनाइयों में साहस और दृढ़ता का रूप धारण कर लेती है।
नदी दूसरों को जल देकर स्वयं निर्मल हो जाती है, उसी प्रकार नारी भी अपना सुख त्यागकर दूसरों के जीवन में प्रसन्नता का संचार करती है। नदी किनारे बसे गाँवों और नगरों की सभ्यता और संस्कृति को समृद्ध करती है, तो नारी अपने संस्कारों से परिवार और समाज को उन्नति की ओर अग्रसर करती है।
लेकिन एक और समानता है – जब नदी को बाँध दिया जाता है, तो उसका स्वाभाविक प्रवाह रुक जाता है, और वह अपनी जीवंतता खो बैठती है। उसी प्रकार नारी को यदि बंधनों और संकीर्णताओं में जकड़ दिया जाए, तो उसकी प्रतिभा और संवेदनाएँ दब जाती हैं। दोनों को स्वतंत्रता और सम्मान चाहिए ताकि वे अपनी पूरी क्षमता से जीवन का पोषण कर सकें।
अतः कहा जा सकता है कि नदी और नारी, दोनों ही जीवन का प्रतीक हैं – निरंतर देने वाले, निरंतर बहने वाले और निरंतर सृजन करने वाले। इनकी महत्ता को समझना और इनका सम्मान करना ही समाज के लिए वास्तविक प्रगति का मार्ग है।
लेकिन एक और समानता है – जब नदी को बाँध दिया जाता है, तो उसका स्वाभाविक प्रवाह रुक जाता है, और वह अपनी जीवंतता खो बैठती है। उसी प्रकार नारी को यदि बंधनों और संकीर्णताओं में जकड़ दिया जाए, तो उसकी प्रतिभा और संवेदनाएँ दब जाती हैं। दोनों को स्वतंत्रता और सम्मान चाहिए ताकि वे अपनी पूरी क्षमता से जीवन का पोषण कर सकें।
अतः कहा जा सकता है कि नदी और नारी, दोनों ही जीवन का प्रतीक हैं – निरंतर देने वाले, निरंतर बहने वाले और निरंतर सृजन करने वाले। इनकी महत्ता को समझना और इनका सम्मान करना ही समाज के लिए वास्तविक प्रगति का मार्ग है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी करने के लिए 3 विकल्प हैं.
1. गूगल खाते के साथ - इसके लिए आप को इस विकल्प को चुनने के बाद अपने लॉग इन आय डी पास वर्ड के साथ लॉग इन कर के टिप्पणी करने पर टिप्पणी के साथ आप का नाम और फोटो भी दिखाई पड़ेगा.
2. अनाम (एनोनिमस) - इस विकल्प का चयन करने पर आप की टिप्पणी बिना नाम और फोटो के साथ प्रकाशित हो जायेगी. आप चाहें तो टिप्पणी के अन्त में अपना नाम लिख सकते हैं.
3. नाम / URL - इस विकल्प के चयन करने पर आप से आप का नाम पूछा जायेगा. आप अपना नाम लिख दें (URL अनिवार्य नहीं है) उस के बाद टिप्पणी लिख कर पोस्ट (प्रकाशित) कर दें. आपका लिखा हुआ आपके नाम के साथ दिखाई पड़ेगा.
विविध भारतीय भाषाओं / बोलियों की विभिन्न विधाओं की सेवा के लिए हो रहे इस उपक्रम में आपका सहयोग वांछित है. सादर.