आलेख - ये अंग्रेजी स्कूलों की हिंदी - ममता श्रवण अग्रवाल

मित्रों, हो सकता है आप में से कोई अंग्रेजी स्कूल में हिंदी के शिक्षक हों और आपको ये बात न अच्छी लगे इसीलिए लिए मैं अग्रिम क्षमा चाहती हूँ. पर मैं जो लिखने जा रही हूँ वह एक हकीकत है जो यह विचार करने पर मजबूर कर देती है कि हमारे बच्चे आज क्या सीख रहे हैं! समझ नही आता कि कहाँ से शुरू करूँ। चलिये पहले मैं एक लेखक की कुछ लाइने लिखना चाहूँगी जो उन्होंने अपनी एक रचना में इस बात का जिक्र करते हुए लिखी थी कि एक बार अंग्रेजी स्कूल में हिन्दी टीचर ने ‘सकुशल’ का अर्थ बच्चों को बतलाया कि सकुशल यानी होता है ,,’ठीक है’

अब अगले दिन बच्चों को इस बात पर पांच वाक्य बनाने थे..... एक बच्चे ने वाक्य बनाये, आप भी देखें

 

मेरे पैर की चोट पहले ज्यादा थी और अब *सकुशल* है।

2 मेरा घर थोड़ा थोड़ा गिर रहा था पर, अब काफी *सकुशल* है।

3 हमारे घर की वाशिंग मशीन बिगड़ गई थी पर शॉप में जाकर *सकुशल* हो गई ।

हमारी स्कूल यूनिफार्म को मम्मा ने अब *सकुशल कर* दिया है क्योंकि वह थोड़ा थोड़ा उधड़ने लगी थी।

आज मेरी स्कूल बस खराब हो गई थी पर ड्राइवर अंकल ने मिस्त्री के यहाँ जाकर उसे *सकुशल* करवा लिया।

 

टीचर ने पढ़ा तो सिर पीट लिया पर बच्चों की क्या गलती? टीचर ने ही तो सकुशल यानी *ठीक* बताया था तो जहां जहां ठीक शब्द आता था वहां वहां बच्चे ने सकुशल शब्द का प्रयोग कर दिया।

 

अब आपको दूसरी घटना बतलाती हूँ - आज मेरा घर जिस जगह पर है, वहाँ से गांव लगे हुये हैं और आपको बिल्कुल ताजी सब्जियाँ खेत से तुड़वा कर मिल जाती हैं। इसी प्रकार दूध ,घी भी बाजार की अपेक्षा ज्यादा शुद्ध मिल जाता है पर यहाँ की  बोली को समझने में मुझे बड़ा समय लगा। यहाँ लोग प्योर को *पेवर* बोलते थे। एक बार मेरी बेटी की इंग्लिश टीचर भी मुझसे बोली कि मैम आप पेवर का घी लिया करिये। मैंने सोचा कि यह पेवर, साँची जैसे ही घी, दूध की कोई कम्पनी होगी। बड़े दिनों बाद मुझे समझ आया कि ये सब *प्योर* को पेवर कहते हैं। आपने कभी एंग्लो इंडियन भाषा भी सुनी होगी। हां, अंग्रेजी और हिंदी को मिलाकर बनी भाषा....नही सुनी तो मैं बतलाती हूँ।

 

एक शब्द हमारी एक पढ़ी लिखी परिचिता हैं, वे अक्सर बोलती हैं जब वो किसी असम्भव से काम को  अथक प्रयास से कर लेती हैं तब वे कहती हैं *जुगाड़ेमेन्ट* हो गया ।

 

इतना तो सब ठीक ही था पर बात तब और आगे बढ़ी जब यह आलेख मैने एक ग्रुप में भेजा तो प्रतिक्रिया स्वरूप एक सज्जन ने बताया कि उनके साथ भी बिल्कुल ऐसी ही एक घटना घटी जब उनके मित्र के यहाँ काफी सालों में पुत्र पैदा हुआ और सभी को आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया...

 

लोगों के पूछने पर उन्होंने बताया कि बच्चे का नाम उन्होंने *श्वान* रखा है। श्वान शब्द सुनकर सभी हैरान रह गए कि यह कैसा नाम है तब उन्होंने बताया कि नाम में क्या खराबी है मैने तो अपने बच्चे का नाम *हंस* ( *Swan )* रखा है। अब लोगों को समझ में आया कि यह स्वान है *श्वान* नहीं।

 

हिंदी भाषा में श्वान का अर्थ *कुत्ता* होता है जो एक प्राणी भले है पर उसका उपयोग अपशब्द के तौर पर किया जाता है जिससे वे अनभिज्ञ थे ।

ऐसे ही  मुझे एक पाठक ने बताया कि हम नामों के नवीनीकरण के चक्कर में अर्थ हीन या नकारात्मक प्रभाव के नाम रख लेते हैं जो जब हमें पता लगते हैं तब तक बच्चे बड़े हो चुके होते है ।

 

ये कुछ ऐसे नाम है जैसे उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बेटे का नाम अन्यांश रखा अन्यांश यानी किसी और का अंश....

 

ऐसे ही मेरे एक परिचित  ने अपने तीन बड़े बेटों के नाम  अनिमेष, अजितेश, अरुमेश की तर्ज पर छोटे बेटे का नाम *अवशेष* रख दिया बाद में नाम सुधार हुआ...

 

अंततः यह तो एक फुरसतनामा था पर इससे यह बात अवश्य तय हो जाती है कि कोई भी भाषा कभी भी गलत नहीं होती है लेकिन उसके उपयोग के पहले हमें यह भलीभाँति ज्ञात होना चाहिये कि, कब ,कहाँ और कैसे इसका प्रयोग करना है जिससे हमें हास्यास्पद स्थिति का सामना न करना पड़े...

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