हम बहनें जब बहुत ही छोटी थीं, वह पाँच-छह साल की रही होगी। छुट्टियों में हम पंजाब दादा- दादी के पास गये थे। घर से दूर उनका कारखाना था, जहाँ वे काम करते थे, और वहाँ से थोड़ी दूरी पर एक बड़ा तालाब था। एक दिन हम बच्चे तालाब के किनारे घर - घर बनाना खेल रहे थे। तालाब से पानी लाते- लाते किनारे पर फिसलन हो गयी। जब मेरी बहन भप्पी ( उसका नाम भूपिंदर कौर, निकनेम भप्पी ) भी पानी लेने गयी, तो वह फिसलकर तालाब में गिर गयी, और डूबने- उतराने लगी। सब बच्चे चिल्लाने लगे - भप्पी नहा रही है, भप्पी नहा रही है। चिल्लाना सुनकर मेरे चाचाजी दौड़े आये, और भप्पी को बचाया। हमें तब मालूम ही नहीं था, कि ऐसे में डूब जाते हैं। कुछ भी हो, नयी स्थितियों में बचपन में ही बच्चों को आगाह अवश्य ही करना चाहिए, और बच्चों को भी सावधानी बरतनी चाहिए।
संस्मरण - रवि रश्मि 'अनुभूति'
कुछ संस्मरण ऐसे होते हैं, जो
खुशियाँ दे जाते हैं, और कुछ याद आते ही दुख देते हैं। ऐसा
ही दुखद संस्मरण है यह। मेरी छोटी बहन लगभग तीन - चार वर्षों तक एक किडनी
फेल होने के कारण दूसरी को बचाने डायलिसिस करने हेतु चुभती सुइयों का दर्द झेलती
हमें छोड़कर चली गयी,
जिसका दुख सालता है, पर भगवान के आगे किसी का जोर
नहीं चलता। अपने कर्म करते हुये भगवान मनुष्य को जब चाहे संसार में भेजता है,
जब चाहे प्राण हर लेता है। हमें इस संसार में अपने कर्म करने होते
हैं, कर्तव्य निभाने होते हैं, और फिर
इस संसार को अलविदा कह जाना होता है, जीवन-मरण के चक्र को
निभाना होता है।
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