ब्रजगजल - कहा भर्यौ करतार तिहारी अँखिय’न में – कृष्ण कुमार ‘कनक’

 

 
कहा भर्यौ करतार तिहारी अँखिय’न में
दीखै सिग संसार तिहारी अँखिय’न में
 
लट की लटकन कहै प्रेम कौ परस करौ
अन गाए कौ प्यार तिहारी अँखिय’न में
 
रूप-रंग रसना तें बाँचें बँचै कहाँ,
बाँचन कौ आधार तिहारी अँखिय’न में
 
दरस परस कों तरसें नैन न चैन परै
हिय कौ कारागार तिहारी अँखिय’न में
 
रहि-रहि आवै यादि बिसारौं सुरति कहाँ,
चंदन की चौपार तिहारी अँखिय’न में
 
जबतें भेरौ भयौ बसेरौ दूरि भयौ
सूनौ ग्रंथागार तिहारी अँखिय’न में
 
अब तौ फेरी करौ हिए कौं चैन परै
हिय के सुख कौ सार तिहारी अँखिय’न में
 
रात दिना कौ दहिबौ सहौ न जाइ 'कनक'
तन कौ तावेदार तिहारी अँखिय’न में

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