12 August 2016

लुत्फ़ आता है ख़ूब उल्फत में - सुनील कुमार जश्न

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सुनील कुमार जश्न 


लुत्फ़ आता है ख़ूब उल्फत में
बात ये झूठ है हकीक़त में ।।।
मौत आती है जिंदा लोगों को
कैसे मरता तुम्हारी फ़ुर्क़त में
खुबसूरत से इक गुनाह के बाद 
दिल लगा ही नहीं इबादत में
सबको संजीदा कर दिया मैंने
हाय क्या हो गया शरारत में
खून थूका न ही ज़बां लटकी 
और इज़ाफा करो इनायत में
डर जुदाई का इस क़दर था "जश्न"
हम मिले ही नहीं मुहब्बत में

सुनील कुमार जश्न
084269 07793

बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122 1212 22


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काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
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