31 July 2014

अपनी-अपनी कारस्तानी - शैल चतुर्वेदी

अपनी-अपनी कारस्तानी
कहना-सुनना है बेमानी

मुखड़ा-मुखड़ा एक मुखौटा
आखर-आखर ग़लत-बयानी

मदिरा-मदिरा घूँट किसी को
कोई पुकारे पानी-पानी

रो कर पूछा – देश कहाँ है
हँस कर बोले – हम का जानी

हँसी बाँटते जीवन बीता
हम से कौन बड़ा है दानी

शब्द-शब्द से अर्थ निकाला
अर्थ मिला तो अक़्ल हिरानी

परिचय शैल हमारा इतना
उमर सयानी – पीर पुरानी 

:- शैल चतुर्वेदी

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

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