28 February 2014

जहाँ में ढूँढना हो तो जहाँ तलाश करें, - सुरेन्द्र चतुर्वेदी


जहाँ में ढूँढना हो तो जहाँ तलाश करें,

हम अपने आप में ख़ुद को कहाँ तलाश करें.

भटक गया है भुलाकर जो सब उसूलों को,
चलो कि फिर से वही कारवाँ तलाश करें.

नज़र वो ढूँढें जो देखे दिलों के भीतर भी,
जो बात दिल की कहे वो ज़ुबाँ तलाश करें.

जहाँ पड़ौस में हरदम सुकून रहता हो,
अगर मिले तो कहीं वो मकाँ तलाश करें.

गुजिस्ता लम्हों की ख़ुशबू नसीब होगी हमें,
अगर दिलों के कहीं दरमियाँ तलाश करें.

यही है ठीक कि हम आख़िरी सफ़र के लिए,
नई ज़मीन, नया आसमां तलाश करें.

बहरे मुजतस मुसमन मख़बून महज़ूफ
मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
1212 1122 1212 22  

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

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