26 January 2011

परतन्तर की हार हुई, हमने परजातन्तर पाया

गणतंत्र दिवस की शुभ कामनाएँ

हर इक हिन्दुस्तानी जब खुल कर अपनी ज़िद पर आया|
परतन्तर की हार हुई, हमने परजातन्तर पाया|१|

जिनके नाम पता उनको तो दिल्ली याद करेगी ही|
हम उनको भी याद करें दिल्ली ने जिनको बिसराया|२|

वंदे माSतरम को गा कर अजब सुकूँ सा मिलता है|
उस का रौब अलग होता जिसने कि तिरंगा फहराया|३|

छुट्टी का कारण बन के रह जाए ना गणतंत्र दिवस|
इसीलिए मैने बच्चों सँग राष्ट्र-गान तन कर गाया|४|

9 comments:

  1. छुट्टी का कारण बन के रह जाए ना गणतंत्र दिवस|
    इसीलिए मैने बच्चों सँग राष्ट्र-गान तन कर गाया|४|
    बिलकुल सही बात है।
    आपको भी गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।

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  2. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  3. आदरणीया निर्मला जी और प्रिय बन्धु प्रवीण जी जय हिंद

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  4. बहुत सुंदर नवीन भाई, आपको भी गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई।

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  5. जय हिंद धर्मेन्द्र भाई

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  6. बहुत खूब नवीन भाई !! और गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!!!!!

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  7. • बिल्‍कुल नए सोच और नए सवालों के साथ समाज की मौजूदा जटिलताओं को उजागर किया है ।

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  8. बहुत सुन्दर तथा नवीन सोच
    बहुत बहुत मुबारक वाद

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  9. अरुण भाई, दीप भाई, मनोज भाई जय हिंद

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