ગઝલ - પ્રવાહ સાથે વહેવાનું છે - હેમંત પુણેકર

  


પ્રવાહ સાથે વહેવાનું છે
તટસ્થ તો પણ રહેવાનું છે
 
બધાએ દુઃખ તો સહેવાનું છે
અમારે ચૂપ પણ રહેવાનું છે 


લહેરમાં છે બસ એ અહિંયા

કશું ન જેને લહેવાનું છે
 
તને ખબર છે - હું જાણું છું
પણ એક વખત તો કહેવાનું છે
 
કહીને છૂટી ગઈ એ 'હેમંત'
કહ્યામાં તારે રહેવાનું છે

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