सुनी ल हो बाबुल अर्जियां
गवनवां हम कबहुँ न जइबे
माई के कोरवा में रहिबे
गवनवां हम कबहुँ न जइबे
माई के अचरा में रहबै
गवनवां हम कबहुँ न जइबे
बाबुल तू हमरा के काही बियाहे
सोन चिरैया हम कही उड़ाए
न पौबे अंगनवा में बाबुल
न पौबे अंगनवा में बाबुल
त ड्योढी पर ठिठका रही जइबे
सुनी ल हो बाबुल....
आई सावन त पीहर याद आये
आई सावन त पीहर याद आये
सावन का झूला के हमके झुलाये
करके करेजवा में सावन
अमरैया में छुप छुप के रौबे
सुनी ल हो बाबुल..

अति सुन्दर प्रस्तुति 👌💐❤️👍
जवाब देंहटाएंअति सुन्दर प्रस्तुति है 👌
जवाब देंहटाएंआपका लॉयर गिरीश मिश्रा 🙏