कविता – सुकून - हर्षा खेड़ा खन्ना

 


राम ने जब पिनाक उठाकर,

प्रत्यंचा होगी चढ़ाई ,

तब क्या एक सांस सुकून की

सीता ले पायी होगी ?

 जब अयोध्या में स्वागत में

तीनों सासों ने प्यार से बलायें ली होंगी

तब क्या एक सांस सुकून की

सीता ले पायी होगी ?

 

जब आडंबर महलों के छोड़

वन जाने को राम के साथ चली होगी

तब क्या एक सांस सुकून की

सीता ले पायी होगी ?

 

जब अशोक वाटिका में हनुमान ने

राम की अंगूठी दिखाई होगी

तब क्या एक सांस सुकून की

सीता ले पायी होगी ?

 

रावण पर विजय पाकर ,

सीता राम जब मिले होंगे

तब क्या एक सांस सुकून की

सीता ले पायी होगी ?

 

जब अग्निपरीक्षा दे कर

अपनी पवित्रता का सबूत दिया होगा

तब क्या एक सांस सुकून की

सीता ले पायी होगी ?

 

जब लव कुश ने रामायण गाकर

सीता की कहानी सबको सुनाई होगी

तब क्या एक सांस सुकून की

सीता ले पायी होगी ?

 

मैं सच में नहीं जानती

पर इतना जानती हूं

कि धरती के फटने पर जब

मां की कोख में

सीता समाई होगी

तब सच में सुकून भरी लम्बी साँस ले पायी होगी

7 टिप्‍पणियां:

  1. धन्यवाद साहित्यंम और नवीन चतुर्वेदी जी

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  2. एक बहुत ही सरल भाषा में कितनी गहरी बात का वर्णन किया है बहुत ही सहारणीय है

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  3. Bahut hi Badhiya likha hai Mom amazing ❤️

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