भोजपुरी गजल - बचपन के हमरा याद के दरपन कहाँ गइल - मनोज भावुक

बचपन के हमरा याद के दरपन कहाँ गइल
माई रे,
अपना
घर के ऊ आँगन कहाँ गइल
खुशबू
भरल सनेह के उपवन कहाँ गइल
भउजी हो,
तहरा
गाँव के मधुवन कहाँ गइल
खुलके
मिले-जुले के लकम अब त ना रहल
विश्वास,
नेह,
प्रेम-भरल
मन कहाँ गइल
हर बात
पर जे रोज कहे दोस्त हम हईं
हमके
डुबाके आज ऊ आपन कहाँ गइल
बरिसत
रहे जे आँख से हमरा बदे कबो
आखिर ऊ
इन्तजार के सावन कहाँ गइल
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