6 August 2016

कल इस धरती पे जब पानी न होगा, बस लहू होगा - नवीन

प्रणाम
May, 2015 - कुछ समय पहले आतंकवादियों ने पाकिस्तान में नन्हे-मुन्ने स्कूली बच्चों के साथ निहायत ही निचले दर्ज़े का अक्षम्य अनाचार किया था। दुनिया भर का शिक्षित और सभ्य समाज इस घटना से बहुत बेचैन हुआ। उन बेचैनी के लमहात में कुछ अशआर हुये थे। मुलाहिज़ा फ़रमाइये: –
कल इस धरती पे जब पानी न होगा, बस लहू होगा
तो मैं ये सोचता हूँ – क्या लहू वाला वुज़ू1 होगा
मुझे मालूम है हमसाये2 के बाबत जो लिक्खा है
मगर ये नईं पता इस पर अमल कब से शुरू होगा
ये जो नफ़रत का राक्षस है न इस की भूख व्यापक है
मुझे खाते ही तय है इस का अगला कौर तू होगा
अरे पंचायतों ने कब किसी की पीर समझी है
तू ही बतला दे वो जो ज़ख़्म है, कैसे रफ़ू होगा
जो हम इतने भी ज़िद को जाहिलीयत3 की बहन कह दें
तो ये तय जानिये चरचा हमारा चार-सू4 होगा
1 नमाज़ पढने से पहले हाथ धोने की क्रिया  2 पड़ौस। अमूमन हर शास्त्र में लिखा है कि अपने पड़ौस का ख़याल रखना चाहिये
3
मूर्खता, जड़ता । शायर का प्रस्ताव है कि अधिकारिक रूप से ज़िद का एक अर्थ मूर्खता भी स्वीकार कर लिया जाये।   4 चारों तरफ़
बहरे हज़ज मुसम्मन सालिम
मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन
1222 1222 1222 1222
नवीन सी चतुर्वेदी


No comments:

Post a Comment

नई पुरानी पोस्ट्स ढूँढें यहाँ पर

काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

यहाँ प्रकाशित सभी सामग्री के सभी अधिकार / दायित्व तत्सम्बन्धित लेखकाधीन हैं| अव्यावसायिक प्रयोग के लिए स-सन्दर्भ लेखक के नाम का उल्लेख अवश्य करें| व्यावसायिक प्रयोग के लिए पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है|

साहित्यम पर अधिकान्शत: छवियाँ साभार गूगल से ली जाती हैं। अच्छा-साहित्य अधिकतम व्यक्तियों तक पहुँचाने के प्रयास के अन्तर्गत विविध सामग्रियाँ पुस्तकों, अनतर्जाल या अन्य व्यक्तियों / माध्यमों से सङ्ग्रहित की जाती हैं। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री पर यदि किसी को किसी भी तरह की आपत्ति हो तो अपनी मंशा विधिवत सम्पादक तक पहुँचाने की कृपा करें। हमारा ध्येय या मन्तव्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं है।