12 August 2016

दोहे - मनोहर अभय

Manohar Abhay's profile photo
मनोहर अभय


किया भरोसा आपका होगी नित ज्योनार 
सुबह शाम की रोटियाँ हुईं और दुश्वार

नखत सिमटने में लगे टूटी तिमिरा घोर
जगा रहा है भोर को गंध पवन झकझोर

मृग शावक ने दौड़ कर मारी एक छलाँग
काजल भरी पहाड़ियाँ गया निमिष में लाँघ

छत पर पड़ी दरार हैं हुए छेद पर छेद 
बिछा रहे तिरपाल हैं छेद कुरेद कुरेद

साग विदुर घर आपने खाया प्रभो महान 
मान बढ़ा यशगान भी मिले दान मतदान

आए बैठे दम लिया लेटे पलंग बिछाय 
हम समझे घर आपना निकला खुली सराय

मार रहे हैं मेमने छिली ईंट की चोट
पीछे बैठे भेड़िए पहने ओवरकोट

घना अँधेरा देख कर माँगा एक चिराग
सजन हमारे दे गए भरे गाँव में आग.

पंख उगे चूजे उड़े लाँघे क्षितिज असीम
व्यथा नीड की क्या कहें बूढ़े पीपल नीम

काजल आँजा धूप ने दुपहर केश सँवार 
साँझ साँवरी सी सजी भिगो गई बौछार

मनोहर अभय
9773141385


दोहे

No comments:

Post a Comment

नई पुरानी पोस्ट्स ढूँढें यहाँ पर

काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

यहाँ प्रकाशित सभी सामग्री के सभी अधिकार / दायित्व तत्सम्बन्धित लेखकाधीन हैं| अव्यावसायिक प्रयोग के लिए स-सन्दर्भ लेखक के नाम का उल्लेख अवश्य करें| व्यावसायिक प्रयोग के लिए पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है|

साहित्यम पर अधिकान्शत: छवियाँ साभार गूगल से ली जाती हैं। अच्छा-साहित्य अधिकतम व्यक्तियों तक पहुँचाने के प्रयास के अन्तर्गत विविध सामग्रियाँ पुस्तकों, अनतर्जाल या अन्य व्यक्तियों / माध्यमों से सङ्ग्रहित की जाती हैं। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री पर यदि किसी को किसी भी तरह की आपत्ति हो तो अपनी मंशा विधिवत सम्पादक तक पहुँचाने की कृपा करें। हमारा ध्येय या मन्तव्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं है।