11 July 2011

कुण्डलिया छन्द - सरोकारों के सौदे

अक्सर ऐसे भी दिखें, कुछ modern परिवार|
मिल जुल कर ज्यों चल रही, गठबंधन सरकार||
गठबंधन सरकार, सरोकारों के सौदे|
अपने-अपने भिन्न, सभी के पास मसौदे|
नित्य नया सा खेल, खेलते हैं ले-दे कर|
दिखते संग, परंतु, दूर होते हैं अक्सर||

19 comments:

  1. अद्भुत! ये सब नवीन भाई आप ही कर सकते हैं।
    हम तो बस ठाले बैठे निठल्ले हैं।।

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  2. बहुत खूब| कई दिनों बाद आना हुआ|यहाँ कविताओं के इतने सारे रूप देखकर बार बार हिंदी साहित्य में और रूचि जागृत होती है| यह मेरा प्रिय विषय है |आशा है इस ब्लॉग पर बहुत कुछ सीखने को मिलेगा| समस्यापूर्ति मंच का पता भी मिल गया| धन्यवाद

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  3. सच है, सबका ही ख्याल रखना पड़ता है।

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  4. एकल परिवार के बढ़ते चलन पर कुण्डली के ज़रिये सटीक व्यंग.

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  5. आज के सन्दर्भ में कुंडली का प्रयोग बहुत अच्छा लगा बधाई
    आशा

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  6. आज की कुंडली में आज के पारिवारिक सन्दर्भ को सटीक रूप में दिखाया है ..

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  7. बहुत खूब ... गठबंधन सरकार तो ऐसे ही चलती है ... फायदा देखते हैं अपना अपना ..

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  8. वर्तमान राजनीतिक दशा पर कटाक्ष करता शानदार छंद...

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  9. बहुत खूब नवीन भाई। कुंडली से आज की स्थिति का सटीक वर्णन किया है आपने।

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  10. बढ़िया छंद और कथ्य दोनों ...नवीन भाई

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  11. गठ्बंधनिया सरकार के मार्फ़त विच्छिन्न होते परिवारों पर व्यंग्य कसाव -दार धार -दार.

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  12. कथ्य और शैली दोनों प्रभावशाली हैं
    इस फ़न में तो ख़ास महारत है आपको
    बधाई स्वीकारें .

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  13. क्या सचबयानी की है नवीन जी आपने

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  14. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

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  15. सत्य कहा ...सटीक तुलना की है कुंडलियों के माध्यम से...

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  16. नित्य नया सा खेल, खेलते हैं ले-दे कर।
    दिखते संग परंतु, दूर होते हैं अक्सर।

    आधुनिक परिवारों की जीवन शैली पर तीखा कटाक्ष।
    बढ़िया रचना।

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  17. कुंडली से आज की स्थिति का सटीक वर्णन किया है|बढ़िया रचना।

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