8 December 2010

नव-युवकों का करना ही होगा अभिनंदन

अद्भुत, अत्युत्तम, अमित, अनुपम, अगम, अपार|
कल थी सारी इंडिया, यूसुफ़ पर बलिहार||
यूसुफ़ पर बलिहार, यार सब हक्के बक्के|
घुमा घुमा कर क्या मारे हैं चौके छक्के|
खेल-कला-व्यापार-राजनीति या प्रबंधन|
नव-युवकों का करना ही होगा अभिनंदन||

9 comments:

  1. सुन्दर सन्देश देती रचना । प्रोत्साहन बहुत बडी चीज़ है। शुभकामनायें।

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  2. बहुत बहुत आभार निर्मला जी संदेश का समर्थन करने के लिए|

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  3. सुन्दर समसामयिक रचना , बधाई।

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  4. धन्यवाद संजय भाई| ओबिओ पर संपादकीय रिपोर्ट आ चुकी है| आप ओबिओ के में पेज पर देख सकते हैं उसे|

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  5. बहुत ही प्रेरणादायक और सकारात्मक पोस्ट

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  6. रचना जी एवम् अनुपमा जी बहुत बहुत धन्यवाद|

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  7. खेल-कला-व्यापार-राजनीति या प्रबंधन|
    नव-युवकों का करना ही होगा अभिनंदन|

    नवयुवकों को समर्पित आपकी ये रचना बहुत अच्छी लगी.

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  8. कुँवर कुसुमेश जी, सराहना के लिए बहुत बहुत आभार|

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