हुनर के रंग भी बिखरे हैं मोतियों की तरह
तेरे वुजूद में पिन्हाँ गुलों की रानाई
मुहब्बतों की तू पैग़ामबर बनी है सदा
तेरा वुजूद यहाँ इर्तेक़ा का ज़ामिन है
मुसीबतों के तईं राहबर बनी है सदा
तू शह्रे-इल्मो-फ़ुनूनो-अदब की साकिन है
तू इनक़लाब के वक़्तों का है अहम हिस्सा
तू एहतेजाज की बनकर सदा उभरती है
रक़म है तुझमें तवारीख़ का हरिक क़िस्सा
तू जुस्तेजू-ए-मआनी से भी सँवरती है
तू ज़िन्दगी में है शामिल इक अंजुमन की तरह
सुकूने-क़ल्ब की सूरत, नयी किरन की तरह
तेरे वुजूद में पिन्हाँ गुलों की रानाई
तेरा वुजूद यहाँ इर्तेक़ा का ज़ामिन है
मुसीबतों के तईं राहबर बनी है सदा
तू शह्रे-इल्मो-फ़ुनूनो-अदब की साकिन है
तू एहतेजाज की बनकर सदा उभरती है
रक़म है तुझमें तवारीख़ का हरिक क़िस्सा
तू जुस्तेजू-ए-मआनी से भी सँवरती है
सुकूने-क़ल्ब की सूरत, नयी किरन की तरह

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