सॉनेट - तेरे हरूफ़ चमकते हैं मोतियों की तरह – इस्मत ज़ैदी शिफ़ा

 

 तेरे हरूफ़ चमकते हैं मोतियों की तरह 
कि तेरे लफ़्ज़ों में है इल्म की शनासाई
हुनर के रंग भी बिखरे हैं मोतियों की तरह
तेरे वुजूद में पिन्हाँ गुलों की रानाई
 
मुहब्बतों की तू पैग़ामबर बनी है सदा
तेरा वुजूद यहाँ इर्तेक़ा का ज़ामिन है
मुसीबतों के तईं राहबर बनी है सदा
तू शह्रे-इल्मो-फ़ुनूनो-अदब की साकिन है
 
तू इनक़लाब के वक़्तों का है अहम हिस्सा
तू एहतेजाज की बनकर सदा उभरती है
रक़म है तुझमें तवारीख़ का हरिक क़िस्सा
तू जुस्तेजू-ए-मआनी से भी सँवरती है
 
तू ज़िन्दगी में है शामिल इक अंजुमन की तरह
सुकूने-क़ल्ब की सूरत, नयी किरन की तरह

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