कहानी – कृतज्ञता – आशा पाण्डेय ‘ओझा’

आज अच्छी बरसात आई, गाँव-गलियों नालियों में पानी भर गया, घरों के चौगान भी सभी जलमग्न हो गये।

अपने कमरे की खिड़की में बैठा चमन पास की सड़क पर तेज बहते हुवे पानी को देख रहा था। अचानक उसकी नजर पानी मे डूबने से खुद को बचाने का प्रयास करते एक नन्हे से पिल्ले पर पड़ी। वह फुर्ती से सड़क की ओर दौड़ा। उसने जलमग्न सड़क में डूबते हुए उस नन्हे पिल्ले को अपनी गोदी में उठाया व तुरंत घर पर ले आया ।

 

पानी में देर तक भीगने के कारण पिल्ला ठिठुर रहा था, वो सिकुड़ रहा था। चमन ने एक पुराना तौलिया लिया उसने उसको पौंछा, व बहुत देर सहलाया ।  पिल्ला अब थोड़ा सहज हो गया। वह चमन का हाथ चाटने लगा।  चमन समझ गया कि पिल्ले को भूख लगी है। एक कटोरी में दूध लाकर चमन ने उस पिल्ले को पिलाया। चमन ने सोचा कि इसके घर वाले इसे  खोज रहे होंगे पर ऐसी जलमग्न सड़कों में कहाँ ले जाऊँ इसे। उसने बारिश रुकने व पानी उतरने का इंतजार करना उचित समझा।

 

अब दिन भर चमन पिल्ले के साथ खेलता रहा, उसके सामने कभी बॉल फैंकता, कभी कोई खाली डिब्बा। कभी दूध रखता, कभी ब्रेड, बिस्किट डालता। चमन ने पिल्ले का नाम बबल रख दिया। शाम पाँच बजे के लगभग बारिश भी पूरी तरह रुक गई व सड़कों का पानी भी उतर गया। चमन ने बबल को गोद में उठाया व उसे उस तरफ ले गया जिस तरफ से पानी के बहाव के साथ बबल के बह कर आने की संभावना थी, कोई आधा किलोमीटर के लगभग चले होंगे कि एक कुतिया तीन नन्हे पिल्लों के साथ एक लकड़ी के ऊँचे  डंठल पर बैठी दिखाई दी। 

 

चमन के हाथ में पिल्ले को देखते ही कुत्तिया लपक कर चमन की तरफ कूदी व बड़े आक्रामक अंदाज में भौंकने लगी जैसे चमन ने ही उसका बच्चा चुराया हो, पर चमन की गोद से उतर कर बबल पिल्ले ने कूँ-कूँ करके जाने क्या कहा कि कुत्तिया भौंकते हुए एकदम चुप हो गई, और उसकी आँखों में अब क्रोध की जगह कृतज्ञता के भाव उतर आए । वह आगे आकर चमन के पाँवो को चाटने लगी। चमन को समझ नहीं आया कि कुत्तिया ऐसा क्यों कर रही है जबकि कुछ देर पहले तो काटने के अंदाज में भौंक रही थी।

 

बबल को छोड़कर चमन घर लौट आया । उसने कुत्तिया के व्यवहार के बारे में अपनी मम्मी से बताया । माँ ने कहा चमन जब उसको पता चला कि आपने उसके बच्चे की जान बचाई है तो वो आपका धन्यवाद कर रही थी। चमन खुश हो रहा था कि बबल को उसका परिवार मिल गया, पर दुःख भी हुआ कि उसका दोस्त चला गया। माँ ने कहा तुम उदास मत होवो रोज शाम बबल से मिलने चले जाना। उसके बिस्किट, रोटी, ब्रेड भी ले जाना। चमन अब ऐसा ही करता।  बबल अपने परिवार के साथ नियत समय  पर चमन का रोज इंतजार करने लगा। सारा परिवार चमन  को देखकर खुश होता । वे सभी चमन के साथ खेलने लगे।

1 टिप्पणी:

  1. हार्दिक धन्यवाद आदरणीय नवीन
    दादा का कहानी प्रकाशित करने के लिए। साहित्यम् परिवार का भी बहुत आभार

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