6 August 2016

ज़िन्दगी है निखार लमहों का - नवीन

ज़िन्दगी है निखार लमहों का।
कीजिये ऐतबार लमहों का॥
आज परियाँ उतरने वाली हैं।
झट से आँगन बुहार लमहों का॥
हम-शुआएँ तेरी तलब में हैं।
वक़्त दामन पसार लमहों का॥
उस ने सदियाँ निसार दीं हम पर।
हम ने माँगा था प्यार लमहों का॥
जिसने पाया वही समझ पाया।
एक बोसा हज़ार लमहों का॥
हम तो उस एक पल में ही गुम हैं।
कैसे करते शुमार लमहों का॥
ऐ ‘नवीन’ अब तो होश में आ जा।
सर से नश्शा उतार लमहों का॥

नवीन सी चतुर्वेदी
बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122 1212 22


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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

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