20 July 2011

३ घनाक्षरी / कवित्त छन्द

समस्या पूर्ति मंच द्वारा आयोजित घनाक्षरी छंद सम्बंधित समस्या पूर्ति के लिए लिखे गए तीन घनाक्षरी छंद 


हिंदी 

माना कि विकास, बीज - से ही होता है मगर
इस का प्रयोग किए- बिना, बीज फले ना|

इस में मिठास हो तो, अमृत समान लगे
खारापन हो अगर, फिर दाल गले ना|

इस का प्रवाह भला कौन रोक पाया बोलो
इस का महत्व भैया टाले से भी टले ना|

चाहे इसे पानी कहो, चाहे इसे ज्ञान कहो
सार तो यही है यार 'नार' बिन चले ना||


समस्या पूर्ति मंच पर की घनाक्षरी छंद वाली समापन पोस्ट में प्रकाशित मेरे दो छन्द 

गुजराती

ઢોકળાં-ખમણ, ભૂંસું, ચેવડા મસાલેદાર,
ફાફડા, ઘારી, જલેબી-ગાંઠિયા પ્રસિદ્ધ છે.

પેંડા તો મલાઈદાર, ઘેરદાર ઘાંઘરો, ને-
કાઠિયાવાડી પાટલા-સાતિયા પ્રસિદ્ધ છે.

કૉક જગ્યા માયાવતી, સોનિયા, જયલલિતા,
કૉક જગ્યા ટાટા વાણી રાડિયા પ્રસિદ્ધ છે.

પણ આખી દુનિયા માં જેમનું પ્રતાપ, ઍ તો,
ગુજરાતી ગરવા ને ડાંડિયા પ્રસિદ્ધ છૅ

देवनागरी लिपि के साथ

ढोकला-खमणभुसूचेवडा मसालेदार,
फाफडाधारीजलेबी-गांठिया प्रसिद्ध छे|

पेंडा तो मलाईदारघेरदार घांघरोने-
काठियावाडी पाटला-सातिया प्रसिद्ध छे|

कोक जग्या मायावतीसोनियाजय-ललिता,
कोक जग्या टाटा वाणी राडिया प्रसिद्ध छे 

पण आखी दुनिया मां जेमनुं प्रताप तो,
गुजराती गरवा ने डांडिया प्रसिद्ध छे||

[इस गुजराती छंद में मदद स्वरूप भाई पंकज त्रिवेदी जी का आभार]


मराठी

भारतात दुसरा शहेर आहे कोण असा,
जागृत चौवीस तास ज्याची पहिचान हो 

कुठल्याही भागातूनआला इथे जे इसम,
इकडच्या कायमी तो झाला इनसान हो 

देशातील सर्वाधिक राजस्व च्या मानकरी 
जगातील रुचिकर कारोबारी स्थान हो|

छोटी-मोठी घटना बिघाड काय करणार,
मी मुंबईकरमाझा मुंबई महान हो||

सरलार्थ

भारत में ऐसा दुसरा कौन सा शहर है
जिसे कभी  सोने वाले शहर की पहिचान हासिल हो  

किसी भी कोने से यहाँ जो भी इन्सान आता है
वो हमेशा के लिये यहाँ का हो जाता है  

देश में सब से ज्यादा राजस्व भरने का गौरव हासिल है इसे  
दुनिया का पसन्दीदा कारोबारी स्थान है

छोटी-मोटी घटना क्या बिगाड लेंगी  
मैं मुंबईकर हूंमेरा शहर मुंबई महान है

8 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
    सीखने का सु-अवसर मिला ||

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  2. नवीन भाई आपके छन्द मौजूदा यथार्थ का सामना करने की कोशिश का नतीजा है।

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  3. सार तो यही है यार 'नार' बिन चले ना

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  4. सच है, दोनों ही आवश्यक हैं।

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  5. आपकी पोस्ट पढ़कर वो कौन -सी कविता है ,याद आ रही है थोड़ा थोड़ा.वो सारी बीच नारी है की नारी बीच सारी है.

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  6. सरक-सरक के निसरती, निसर निसोत निवात |
    चर्चा-मंच पे आ जमी, पिछली बीती रात ||

    http://charchamanch.blogspot.com/

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