22 February 2011

दूसरी समस्या पूर्ति - दोहा - घोषणा

सभी साहित्य रसिकों का सादर अभिवादन|

दूसरी समस्या पूर्ति की घोषणा का समय आ गया है| आदरणीय शास्त्री जी, आचार्य सलिल जी और भाई रविकान्त पाण्डेय जी के आलेख पढ़ चुके होंगे अब तक आप लोग| दूसरी समस्या पूर्ति दोहों को ले कर ही है| जिन लोगों ने अब तक नहीं पढ़ा हो उपरोक्त आलेखों को, यहीं ब्लॉग पर फिर से पढ़ सकते हैं| वैसे मैं संक्षिप्त में एक बार फिर से दोहों के बारे में यहाँ प्रकाश डाल देता हूँ:

दोहा - चार चरण
पहला और तीसरा चरण = 13 मात्रा, अंत में लघु गुरु अपेक्षित
दूसरा और चौथा चरण = 11 मात्रा, अंत में गुरु लघु अपेक्षित
उदाहरण:-
बुरा जु देखन में चला
12 1 211 2 12 = 13
बुरा न मिल्या कोय
12 1 112 21 = 11
जो दिल देखा आपुना
2 11 22 212 = 13
मो से बुरा न कोय
2 2 12 1 21 = 11

मात्रा गिनती के बारे में संक्षिप्त में इस ब्लॉग के नीचे के भाग में भी एक टेक्स्ट दिया हुआ है|

समस्या पूर्ति की पंक्ति :- "होली का त्यौहार"

कवियों से प्रार्थना है कि कम से कम 3 दोहे प्रस्तुत करें
समस्या पूर्ति की पंक्ति 'होली का त्यौहार' को किसी भी एक दोहे के किसी भी एक चरण में प्रयोग करें| आप देखेंगे कि इस पंक्ति कि मात्राओं कि गिनती होती है 11, यानि ये किसी भी चरण में आ सकती है|
एक और बात, कहन को विस्तार देने के लिहाज से, कवि गण इस पंक्ति में प्रयुक्त शब्द 'का' की जगह 'के', 'सा' या 'से' भी ले सकते हैं, यथा:-

[1] होली के त्यौहार की बड़ी अनोखी बात
[2] दुनिया भर में भिन्न है होली का त्यौहार
[3] होली सा त्यौहार है ये सारा संसार

विशेष :- ये उदाहरण नए लोगों के लिए हैं| स्थापित विद्वान तो स्वयं समर्थ हैं ही|

आप सभी से सविनय निवेदन है कि अपनी अपनी पूर्तियाँ यथा शीघ्र navincchaturvedi@gmail.com पर भेजने की कृपा करें|

पूर्व में इस ब्लॉग पर दोहों पर प्रकाशित आलेखों की लिंक्स एक बार फिर से :-



सभी साहित्य रसिकों से एक बार फिर से विनम्र निवेदन है कि भारतीय छंद साहित्य की सेवा स्वरुप आरंभ किए गए इस आयोजन में अपना बहुमूल्य योगदान देने की कृपा करें|

सादर

4 comments:

  1. बहुत अच्छा प्रयास है। दोहा कभी लिखा नही मगर कोशिश करते हैं। धन्यवाद।

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  2. आदरणीया निर्मला कपिला जी आप का उत्साह हम जैसे विद्यार्थियों में नव-उत्साह का संचार कर देता है | आप का मित्र मंडली सह सहर्ष स्वागत है|

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  3. साल भर में आया है फागुन धीरे धीरे चल के |
    भौजी को सारा रंग दिया देवर ने खूब मचल के ||

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  4. वाह क्या दोहे आए हैं, क्या कहने, क्या कहने
    बस 1-2 दिन बाद ही आप सभी को पढ़ने ka मौका मिलेगा

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