30 November 2014

चौपई छन्द - अशोक कुमार रक्ताले

चौपई छन्द – अशोक कुमार रक्ताले

छिड़ी हुई शब्दों की जंग
दिखा रहे नेता जी रंग
वैचारिकता नंगधडंग
सुनकर हैरत जन-जन दंग

जाति धर्म के पुते सियार
इनपर कहना है बेकार
बात-बात पर दिल पर वार
जन मानस पर अत्याचार

पांच वर्ष में एक चुनाव
छोड़े मन पर कई प्रभाव
महँगाई भी देती घाव
डुबो रही है सबकी नाव

नारी दोहन अत्याचार
मिला नहीं अबतक उपचार
सरकारें करती उपकार
निर्धन फिरभी हैं बीमार

तीर तराजू औ तलवार
किसे कहें अब जिम्मेदार
चढ़ा देश को अजब बुखार
हर-हर घर-घर इक सरकार

फूल पत्तियाँ तीर-कमान
चौसर पर हैं कई निशान
मतदाता सारे हैरान
किसे करें अपना मतदान 

No comments:

Post a Comment

नई पुरानी पोस्ट्स ढूँढें यहाँ पर

काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

यहाँ प्रकाशित सभी सामग्री के सभी अधिकार / दायित्व तत्सम्बन्धित लेखकाधीन हैं| अव्यावसायिक प्रयोग के लिए स-सन्दर्भ लेखक के नाम का उल्लेख अवश्य करें| व्यावसायिक प्रयोग के लिए पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है|

साहित्यम पर अधिकान्शत: छवियाँ साभार गूगल से ली जाती हैं। अच्छा-साहित्य अधिकतम व्यक्तियों तक पहुँचाने के प्रयास के अन्तर्गत विविध सामग्रियाँ पुस्तकों, अनतर्जाल या अन्य व्यक्तियों / माध्यमों से सङ्ग्रहित की जाती हैं। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री पर यदि किसी को किसी भी तरह की आपत्ति हो तो अपनी मंशा विधिवत सम्पादक तक पहुँचाने की कृपा करें। हमारा ध्येय या मन्तव्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं है।