9 October 2012

चन्द अशआर - नवीन

कुछ ऐसे झूम कर बरसे तुम्हारे प्यार के बादल
कि दिल की झील से हर ओर झरने फूट कर निकले

शिकायत तो नहीं कोई मगर अफसोस इतना है
मुहब्बत सामने थी और हम दुनिया में उलझे थे

फासला इस क़दर जुरुरी था
उसकी जुल्फ़ों को ही छुआ मैंने

तसल्ली की रिहाइश आजकल वैसे भी मुश्किल है
तुम्हारे दिल में रहने के लिए कुछ ग़म भी सह लेंगे

न ये इलज़ाम पहला है, न ये तौहीन पहली है
बस इतना फ़र्क है इस बार वो भी कटघरे में हैं

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