31 July 2014

प्यार का दीप किसी राधा ने बाला होगा - महीपाल

प्यार का दीप किसी राधा ने बाला होगा
दूर मीरा पे गया उस का उजाला होगा

वो महल की हो कथा या कि व्यथा कुटिया की
उन्हीं जल-थल हुई आँखों का हवाला होगा

तुमने कैसे ऐ मुसम्मात फटे आँचल में
दूध और दर्द का सैलाब सँभाला होगा

फट गया होगा हिमालय का कलेज़ा घुट कर
तब किसी हुक ने गङ्गा को निकाला होगा

चाँद का सौदा किया घर में अमावस कर ली
दोस्त! क्या चाँद के टुकड़ों से उजाला होगा

बुत की पायल जो हसीं तुमने तराशी महिपाल
उस में बजने का गुमाँ किस तरह डाला होगा

:- महीपाल

बहरे रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़
फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन
2122 1122 1122 22

No comments:

Post a Comment

यहाँ प्रकाशित सभी सामग्री के सभी अधिकार / दायित्व तत्सम्बन्धित लेखकाधीन हैं| अव्यावसायिक प्रयोग के लिए स-सन्दर्भ लेखक के नाम का उल्लेख अवश्य करें| व्यावसायिक प्रयोग के लिए पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है|

साहित्यम पर अधिकान्शत: छवियाँ साभार गूगल से ली जाती हैं। अच्छा-साहित्य अधिकतम व्यक्तियों तक पहुँचाने के प्रयास के अन्तर्गत विविध सामग्रियाँ पुस्तकों, अनतर्जाल या अन्य व्यक्तियों / माध्यमों से सङ्ग्रहित की जाती हैं। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री पर यदि किसी को किसी भी तरह की आपत्ति हो तो अपनी मंशा विधिवत सम्पादक तक पहुँचाने की कृपा करें। हमारा ध्येय या मन्तव्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं है।

My Bread and Butter