30 April 2014

चोट पर उसने फिर लगाई चोट - सालिम शुजा अन्सारी

चोट पर उसने फिर लगाई चोट
हो गई और भी सिवाई चोट

उम्र भर ज़ख्म बोए थे उस ने
उम्र भर हम ने भी उगाई चोट

मरहम ए एतबार की खातिर
मुद्दतों खून में नहाई चोट

दिल का हर ज़ख्म मुस्करा उठा
देख कर उसको याद आई चोट

होंठ जुम्बिश न कर सके लेकिन
कर गई फिर भी लब क़ुशाई चोट

आज बे साख्ता वो याद आया
आज मौसम ने फिर लगाई चोट

मिट गए सब निशान ज़ख्मों के
कर गई आज बे वफ़ाई चोट

ज़र्ब यूँ तो बदन पे थी “सालिम ”
रूह तक कर गयी रसाई चोट

:- सालिम शुजा अन्सारी
9837659083

बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122 1212 22

6 comments:

  1. Is radeef par koi ghazal itni khoobsoorat nahin kahi ja sakati --sirf aur sirf ye Saalim saahab ke bas ki baat hai !! Zubaan ke sher bhi mile --
    मरहम ए एतबार की खातिर
    मुद्दतों खून में नहाई चोट

    आज बे साख्ता वो याद आया
    आज मौसम ने फिर लगाई चोट
    Mujhe Zindagi me khud par fakhra hota hai ki Saalim saahab jaisa faankaar mujhase guftgu bhi karata hai !!!

    ReplyDelete
  2. Bahut Shandaar ghazal... RADEEF khoob nibhayi gayi hai.. baaqi baateN bilkul Mayank bhai ki tarah...Mujhe zindagi .
    ..

    ReplyDelete
  3. Bahut Shandaar ghazal... RADEEF khoob nibhayi gayi hai.. baaqi baateN bilkul Mayank bhai ki tarah...Mujhe zindagi .
    ..

    ReplyDelete
  4. saalim shuja ansariSun May 04, 02:34:00 pm 2014

    aap tamam hazraat ka mashkoor hoon mamnoon .....jinhoN ne meri izzat afzaayee ki........ye sab aapki muhabbat he MAYANK BHAI, AZAM BHAI, RAJENDRA BHAI, .....

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  5. saalim shuja ansariSun May 04, 02:36:00 pm 2014

    khaas taur par NAVIN bhai aapka shukriya jinhoN ne mujhe is qabil samjha

    ReplyDelete

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

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