5 February 2011

रब नें ग़ज़ब यार प्रकृति बनाई है

ROSE


बनाई है विधाता नें वसुंधरा बाक़ायदा
रीति-नीति-प्रीति, कन-कन में समाई है|

समाई है सम्‍वेदना, दान-प्रतिदान, मान,
आन-बान, ख़ान-पान प्रभुता बताई है|

बताई है पते की बात यै ही हर शास्त्र* नें
लाँघी मरज़ाद जानें, वानें हार पाई है|

पाई है बिना एफर्ट हमनें बतौर गिफ्ट
रब नें ग़ज़ब यार प्रकृति बनाई है||
बनाई है..............

ब्रजभाषा, हिन्दी, उर्दू और अँग्रेज़ी शब्दों के साथ अनुप्रास अलंकार से अलंकृत यह "सांगोपांग सिंहावलोकन" छंद है|
इस छंद में व्यक्त बातों से जुड़ी शंकाओं के समाधान हेतु गुलाब के फूल का चित्र है|



*one may consider this as a research based STUDY with logics

3 comments:

  1. बहुत मनभावन...ब्रज भाषा का हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी के शब्दों के साथ अच्छा संयोजन. बहुत सुन्दर

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  2. अरविंद भाई धन्यवाद|

    कैलाश शर्मा जी भाषाई बंधनों से मुक्त हो कर लिखने का मज़ा ही अलग आता है| आपकी पारखी नज़र को सलाम|

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