30 November 2014

ऐसा ठुकराया है किसी की यादों ने - नवीन

ऐसा ठुकराया है किसी की यादों ने
जैसे पिंजड़े खोल दिये सय्यादों ने

उस पत्थर-दिल को शायद मालूम नहीं
लैला को मशहूर किया फ़रियादों ने

दिल टूटे, साँसें उखड़ीं तब राज़ खुला
महल सम्हाले रक्खे थे बुनियादों ने

इश्क़ इसे कहिये या फिर कहिये बैराग
ठण्डा कर डाला है सुलगती यादों ने

राम तो बन गये अवध-नरेश मगर साहब

मन का मन्दर लूट लिया मरयादों ने

:- नवीन सी. चतुर्वेदी 

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

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