1 June 2014

तख़य्युल के फ़लक से कहकशाएँ हम जो लाते हैं - मुमताज़ नाज़ां



तख़य्युल के फ़लक से कहकशाएँ हम जो लाते हैं
सितारे ख़ैरमक़दम के लिए आँखें बिछाते हैं

मेरी तनहाई के दर पर ये दस्तक कौन देता है
मेरी तीराशबी में किस के साए सरसराते हैं

हक़ीक़त से अगरचे कर लिया है हम ने समझौता
हिसार-ए-ख़्वाब में बेकस इरादे कसमसाते हैं

मज़ा तो ख़ूब देती है ये रौनक़ बज़्म की लेकिन
मेरी तन्हाइयों के दायरे मुझ को बुलाते हैं

बिलखती चीख़ती यादें लिपट जाती हैं क़दमों से
हज़ारों कोशिशें कर के उसे जब भी भुलाते हैं

ज़मीरों में लगी है ज़ंगज़हन-ओ-दिल मुकफ़्फ़ल हैं
जो ख़ुद मुर्दा हैंजीने की अदा हम को सिखाते हैं

वो लम्हेजो कभी हासिल रहे थे ज़िंदगानी का
वो लम्हे आज भी “मुमताज़” हम को ख़ूँ रुलाते हैं

मुमताज़ नाज़ां


बहरे हज़ज मुसम्मन सालिम
मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन
1222 1222 1222 1222


No comments:

Post a Comment

नई पुरानी पोस्ट्स ढूँढें यहाँ पर

काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

यहाँ प्रकाशित सभी सामग्री के सभी अधिकार / दायित्व तत्सम्बन्धित लेखकाधीन हैं| अव्यावसायिक प्रयोग के लिए स-सन्दर्भ लेखक के नाम का उल्लेख अवश्य करें| व्यावसायिक प्रयोग के लिए पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है|

साहित्यम पर अधिकान्शत: छवियाँ साभार गूगल से ली जाती हैं। अच्छा-साहित्य अधिकतम व्यक्तियों तक पहुँचाने के प्रयास के अन्तर्गत विविध सामग्रियाँ पुस्तकों, अनतर्जाल या अन्य व्यक्तियों / माध्यमों से सङ्ग्रहित की जाती हैं। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री पर यदि किसी को किसी भी तरह की आपत्ति हो तो अपनी मंशा विधिवत सम्पादक तक पहुँचाने की कृपा करें। हमारा ध्येय या मन्तव्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं है।