30 April 2014

मेरे मौला की इनायत के सबब पहुँचा है - नवीन

मेरे मौला की इनायत के सबब पहुँचा है
ज़र्रा-ज़र्रा यहाँ रहमत के सबब पहुँचा है
मौला - स्वामी / मालिक / प्रभु, इनायत - कृपा, के सबब - के कारण से

कोई सञ्जोग नहीं है ये अनासिर का सफ़र
याँ हरिक शख़्स इबादत के सबब पहुँचा है
अनासिर का सफ़र - पञ्च-भूत की यात्रा, यानि पृथ्वी पर मनुष्य योनि में जन्म

दोस्त-अहबाब हक़ीमों को दुआ देते हैं
जबकि आराम अक़ीदत के सबब पहुँचा है
अक़ीदत - श्रद्धा / विश्वास

न मुहब्बत न अदावत न फ़रागत न विसाल
दिल जुनूँ तक तेरी चाहत के सबब पहुँचा है
फ़रागत - अलग होना / निवृत्ति, विसाल - मिलन, जुनून - उन्माद / पागलपन 

एक तो ज़ख्म दिया उस पे यूँ फ़रमाया 'नवीन'
"तीर तुझ तक, तेरी शुहरत के सबब पहुँचा है"

बहरे रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़
फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन
2122 1122 1122 22 

1 comment:

  1. ये कमाल की गजल है सर, बहुत बेहतरीन।

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

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