14 February 2012

जब से मेरी लगन लगी है

जब से मेरी लगन लगी है
मेरे साईं राम से
सच कहता हूँ कटने लगी है
ज़िन्दगी आराम से



साईं तो है सब का खिवैया
सब की पार लगाये वो नैया
   भगत बुलाये वो ना आये
   ऐसा कभी हो सकता नहीं
      उस का बंदा नीर बहाये
      तो चैन से वो सकता नहीं
नंगे पाँव चला आता है
पुकारो किसी भी नाम से
सच कहता हूँ कटने लगी है
ज़िन्दगी आराम से


मतवाला वो सब से निराला
सब को पिलाये प्रेम का प्याला
   मैं माँगूँ और वो न पिलाये
   ऐसा कभी हो सकता नहीं
      उस को मेरी याद न आये
      ऐसा कभी हो सकता नहीं
प्रेम का प्याला मिले प्रेम से
पा न सके कोई दाम से
सच कहता हूँ कटने लगी है
ज़िन्दगी आराम से


जिसने माँगा उस ने पाया
सब के सर पर उस का साया
   शरणागत को ना अपनाये
  
ऐसा कभी हो सकता नहीं
      मन का चाहा भक्त न पाये
     
ऐसा कभी हो सकता नहीं
खाली हाथ न लौटा कोई
बंदा उस के धाम से 
सच कहता हूँ कटने लगी है
ज़िन्दगी आराम से

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर...
    साईं से प्रेम...और साईं का हमसे प्रेम...
    अदभुद..

    जय जय साईं राम...साईं राम जय जय राम...

    ReplyDelete