4 March 2011

अभिव्यक्ति

व्यक्ती से बढ़ कर सदा, होता इस का मान|
सब के सर चढ़ बोलती, इक नन्ही सी जान||
इक नन्ही सी जान, शान से रहती हरदम|
जो भी दिल में आय, बताती झट्ट फडक्दम|
इस का मूल विवेक, शख्सियत इसकी शक्ती|
कहना इस का काम, नाम इस का अभिव्यक्ती||

6 comments:

  1. बढिया लिख डाला आपने, बैठे-ठाले :)

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  2. aapne to abhivyakti ki paribhasha batadi achhi lagi

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  3. प्रवीण भाई, वंदना जी, रचना जी और सुनील भाई आप सभी का बहुत बहुत आभार उत्साह वर्धन के लिए

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