मराठी ग़ज़ल - भाग्यात जे न लिहिले ते लाभणार नाही - देवदत्त संगेप

 

 

भाग्यात जे न लिहिले ते लाभणार नाही

मानावयास पण  हे कोणी तयार नाही

 

उध्वस्त वावरांचे पाहून हाल सारे

हतबल कृषीवलाच्या दुःखास पार नाही

 झालेत पंचनामे, तेही हवा हवाई

अहवाल आज आला, 'नुकसान फार नाही'

 

उंचीस गाठल्यावर इतकेच भान ठेवा

ऐसा चढाव नाही ज्याला उतार नाही

 

कैदेतुनी कुडीच्या  सुटका करून नेतो

मृत्यू समान जिगरी दिलदार यार नाही

1 टिप्पणी:

  1. हृदय से आभार आपका नवीन जी मेरी मराठी रचना को सम्मान देने के लिए. 🌹 🌹. देवदत्त संगेप नागपूर.

    जवाब देंहटाएं

टिप्पणी करने के लिए 3 विकल्प हैं.
1. गूगल खाते के साथ - इसके लिए आप को इस विकल्प को चुनने के बाद अपने लॉग इन आय डी पास वर्ड के साथ लॉग इन कर के टिप्पणी करने पर टिप्पणी के साथ आप का नाम और फोटो भी दिखाई पड़ेगा.
2. अनाम (एनोनिमस) - इस विकल्प का चयन करने पर आप की टिप्पणी बिना नाम और फोटो के साथ प्रकाशित हो जायेगी. आप चाहें तो टिप्पणी के अन्त में अपना नाम लिख सकते हैं.
3. नाम / URL - इस विकल्प के चयन करने पर आप से आप का नाम पूछा जायेगा. आप अपना नाम लिख दें (URL अनिवार्य नहीं है) उस के बाद टिप्पणी लिख कर पोस्ट (प्रकाशित) कर दें. आपका लिखा हुआ आपके नाम के साथ दिखाई पड़ेगा.

विविध भारतीय भाषाओं / बोलियों की विभिन्न विधाओं की सेवा के लिए हो रहे इस उपक्रम में आपका सहयोग वांछित है. सादर.