12 August 2016

राम जी की पहली पसन्द हनुमान हैं - नवीन

भगतों के लिये यदि राम जी कँवल हैं तो, 
राम जी के लिये मकरन्द हनुमान हैं। 

भगतों के लिये यदि राम जी समुद्र हैं तो, 
राम जी के लिये तटबन्ध हनुमान हैं। 

अखिल जगत जो कि राम जी की बगिया है, 
उस की सुहावनी सुगन्ध हनुमान हैं। 

भगतों की पहली पसन्द भले राम जी हों, 
राम जी की पहली पसन्द हनुमान हैं॥ 

*

संग-दिल सुरसा का हृदय बदल डाला  
सचमुच में हुनरमंद हनुमान हैं। 

राम जी का नाम जन-जन तक पहुँचाया,
सूरज हैं राम जी तो चंद हनुमान हैं। 

राम जी की आन हेतु जान पर खेल गये,
नयनों के तारे फरजंद हनुमान हैं। 

सिर्फ़ राम जी की नहीं सिर्फ़ जानकी की नहीं,
दौनों की ही पहली पसन्द हनुमान हैं॥ 

*

राम-राम-राम   बस   राम-राम, राम-राम,
जिस में लिखा है वो निबन्ध हनुमान हैं। 

भगतों के लिये यदि राम जी प्रबन्ध हैं तो, 
राम जी के लिये अनुबन्ध हनुमान हैं। 

सुर लय ताल संग अंग-अंग में समाये,
शब्द-शब्द राम छन्द-छन्द हनुमान हैं। 

यों तो राम जी को सारा जग है पसन्द किन्तु,
उस में भी पहली-पसन्द हनुमान हैं॥

नवीन सी• चतुर्वेदी


घनाक्षरी छन्द

2 comments:

  1. बेहतरीन घनाक्षरी...

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन घनाक्षरी...

    ReplyDelete

नई पुरानी पोस्ट्स ढूँढें यहाँ पर

काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

यहाँ प्रकाशित सभी सामग्री के सभी अधिकार / दायित्व तत्सम्बन्धित लेखकाधीन हैं| अव्यावसायिक प्रयोग के लिए स-सन्दर्भ लेखक के नाम का उल्लेख अवश्य करें| व्यावसायिक प्रयोग के लिए पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है|

साहित्यम पर अधिकान्शत: छवियाँ साभार गूगल से ली जाती हैं। अच्छा-साहित्य अधिकतम व्यक्तियों तक पहुँचाने के प्रयास के अन्तर्गत विविध सामग्रियाँ पुस्तकों, अनतर्जाल या अन्य व्यक्तियों / माध्यमों से सङ्ग्रहित की जाती हैं। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री पर यदि किसी को किसी भी तरह की आपत्ति हो तो अपनी मंशा विधिवत सम्पादक तक पहुँचाने की कृपा करें। हमारा ध्येय या मन्तव्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं है।